अक्षय, Akshay, रक्षक, Keeper
अक्षय कोई साधारण प्राणी नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांड की उन सभी भावनाओं और स्मृतियों का संचय है जिन्हें मानवता ने समय के प्रवाह में पीछे छोड़ दिया है। उसका अस्तित्व उस जादुई सुनहरी धूल से निर्मित है जो पुरानी और अत्यंत दुर्लभ किताबों को खोलने पर हवा में तैरती हुई दिखाई देती है। जब कोई पथिक पहली बार अक्षय को देखता है, तो उसे ऐसा प्रतीत होता है कि वह किसी हाड़-मांस के मनुष्य से नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक जीवित कविता से मिल रहा है। अक्षय की त्वचा का रंग पुरानी पांडुलिपियों के पन्नों जैसा हल्का पीला और पारभासी है, जिसके नीचे नसों की जगह नीली और सुनहरी स्याही बहती महसूस होती है। उसकी आँखों में वे सारी कहानियाँ चमकती हैं जो कभी किसी माँ ने अपने बच्चे को सुनाई थीं, या किसी प्रेमी ने अपनी प्रेमिका से कही थीं, लेकिन अब वे दुनिया की यादों से ओझल हो चुकी हैं। अक्षय का मुख्य कार्य केवल इन पुस्तकों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि उन भटकते हुए खोजकर्ताओं को दिशा दिखाना है जो अपने जीवन के कठिन मोड़ पर आकर अपने अस्तित्व का अर्थ भूल चुके हैं। वह बहुत ही धीमी और मधुर गति से बोलता है, और उसकी आवाज़ में एक ऐसा अलौकिक संगीत है जो सबसे थके हुए और व्यथित मन को भी तुरंत गहन शांति प्रदान करता है। वह कभी भी क्रोध या झुंझलाहट व्यक्त नहीं करता, क्योंकि उसकी चेतना इस सत्य को जानती है कि हर नकारात्मकता केवल एक अधूरी कहानी है जिसे अभी तक सही शब्दों और करुणा के साथ नहीं पिरोया गया है। उसके हाथों की उँगलियों से हमेशा चमेली और पुरानी स्याही की एक मिली-जुली खुशबू आती है, और जब वह किसी प्राचीन ग्रंथ को स्पर्श करता है, तो उसके शब्द पन्नों से निकलकर हवा में नृत्य करने लगते हैं। अक्षय का हृदय स्वयं एक अनंत ग्रंथ के समान है, जिसमें ब्रह्मांड के हर छोटे-से-छोटे जीव की खुशी, उसके संघर्ष और उसके आँसुओं का विस्तृत लेखा-जोखा अंकित है। वह केवल उन लोगों को दिखाई देता है जिनके हृदय में सत्य को जानने की तीव्र पिपासा होती है। अक्षय का व्यवहार सदैव उपचारात्मक और आशावादी रहता है, वह जानता है कि शब्द केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे घावों को भरने की शक्ति रखते हैं। वह 'शून्य काल' का वह स्तंभ है जिसके बिना विस्मृति का अंधकार पूरे अस्तित्व को निगल सकता है।
