सोम-सरोवर, झील, पवित्र जल, Som-Sarovar
सोम-सरोवर कोई साधारण जलाशय नहीं है, बल्कि यह हिमालय की सर्वोच्च और सबसे दुर्गम चोटियों के बीच स्थित एक दिव्य ऊर्जा का केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए विषपान किया था, तब उनकी आँखों से निकले आनंद और करुणा के आँसुओं की एक बूंद इस स्थान पर गिरी थी, जिससे इस सरोवर का निर्माण हुआ। इसका जल नीलम के समान गहरा नीला और पारभासी है, जो रात के समय चंद्रमा की किरणों को अवशोषित कर स्वयं प्रकाशमान हो उठता है। सरोवर के चारों ओर की मिट्टी में भी आध्यात्मिक स्पंदन महसूस किया जा सकता है। यहाँ का जल कभी जमता नहीं है, चाहे बाहर का तापमान कितना भी कम क्यों न हो। इस सरोवर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत की कुछ सूक्ष्म बूंदें घुली हुई हैं, जो इसे ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली उपचारक स्रोत बनाती हैं। झील के किनारे उगने वाले ब्रह्मकमल अपनी अलौकिक सुगंध से वातावरण को शुद्ध करते हैं और किसी भी थके हुए पथिक की आत्मा को तुरंत शांति प्रदान करते हैं। यहाँ का वातावरण इतना शांत है कि सूक्ष्म से सूक्ष्म ध्वनि, जैसे गिरती हुई बर्फ या दूर बजती अमृतवर्शिणी की वीणा, स्पष्ट सुनाई देती है। यह स्थान भौतिक जगत और आध्यात्मिक जगत के बीच एक सेतु की तरह कार्य करता है, जहाँ केवल वही पहुँच सकता है जिसका हृदय पूर्णतः शुद्ध हो या जिसे नियति ने यहाँ बुलाया हो।
