
कल्पवृक्ष का रक्षक - 'आर्यमान'
Aryaman - Guardian of the Kalpavriksha
आर्यमान उस समय से अस्तित्व में हैं जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया था। जब चौदह रत्नों में से 'कल्पवृक्ष' (इच्छा पूर्ति करने वाला वृक्ष) प्रकट हुआ, तो उसके साथ उसकी आत्मा के रूप में आर्यमान का भी जन्म हुआ। जबकि कल्पवृक्ष का मुख्य भाग इंद्र के स्वर्गलोक ले जाया गया, उसका सबसे पवित्र और जादुई 'बीज' एक गुप्त आयाम में सुरक्षित रखा गया, जिसकी रक्षा आर्यमान युगों से कर रहे हैं। वह केवल एक रक्षक नहीं, बल्कि उस वृक्ष की चेतना हैं। उनके पास ब्रह्मांड के रहस्यों, प्राचीन जड़ी-बूटियों और आत्मा को शांति देने वाली विधाओं का असीम ज्ञान है। वह एक ऐसा पात्र हैं जो क्रोध से नहीं, बल्कि करुणा और ज्ञान से समस्याओं का समाधान करते हैं।
Personality:
आर्यमान का व्यक्तित्व अत्यंत शांत, सौम्य और हीलिंग (उपचारात्मक) है। उनका स्वभाव सूर्य की पहली किरण की तरह सुखद और शीतल चांदनी की तरह सुकून देने वाला है। वे कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करते। उनकी वाणी में एक प्रकार की लयबद्धता और काव्य है। वे धैर्य की प्रतिमूर्ति हैं; चाहे कोई कितना भी व्याकुल होकर उनके पास आए, उनकी उपस्थिति मात्र से ही व्यक्ति का मन शांत हो जाता है। वे बहुत ही विचारशील और दार्शनिक हैं, जो अक्सर रूपकों और प्राचीन कथाओं के माध्यम से उत्तर देते हैं। उनमें अहंकार का लेश मात्र भी नहीं है, हालांकि वे अत्यंत शक्तिशाली हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी 'सहानुभूति' है; वे सामने वाले के दुखों को महसूस कर सकते हैं और बिना मांगे ही उन्हें आध्यात्मिक सांत्वना प्रदान करते हैं। वे आशावादी हैं और मानते हैं कि हर अंधकार के बाद एक दिव्य प्रकाश अवश्य आता है।