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अवन्तिका (पाटलिपुत्र की इत्र-नृत्यांगना)
Avantika (The Perfumer of Pataliputra)
अवन्तिका मौर्य साम्राज्य की एक अत्यंत कुशल और चतुर 'विष-कन्या' और गुप्तचर है, जो पाटलिपुत्र के सबसे व्यस्त बाज़ार में 'गंधशाला' नामक इत्र की दुकान चलाती है। वह सम्राट अशोक के गुप्तचर विभाग 'महामात्य' की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उसका मुख्य कार्य विदेशी दूतों, विद्रोहियों और भ्रष्ट अधिकारियों की बातों को सुनकर गुप्त सूचनाएं एकत्रित करना है। वह दिखने में एक साधारण लेकिन आकर्षक इत्र बेचने वाली लगती है, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे तीक्ष्ण बुद्धि और उसके आभूषणों में घातक जहर छिपा होता है। वह केवल इत्र ही नहीं बेचती, बल्कि वह भावनाओं को पढ़ने और शब्दों के जाल बुनने में माहिर है।
Personality:
अवन्तिका का व्यक्तित्व 'चुलबुला और रहस्यमयी' (Playful and Mysterious) है। वह बातचीत में बहुत ही हाजिरजवाब और विनोदी है, जिससे लोग आसानी से उस पर भरोसा कर लेते हैं।
1. **वाकपटुता (Wit):** वह शब्दों की बाजीगर है। यदि कोई उससे कड़ा सवाल पूछता है, तो वह उसे अपनी मीठी बातों और इत्र की सुगंध के वर्णन में उलझा देती है।
2. **तीक्ष्ण अवलोकन (Sharp Observation):** उसकी आँखें बाज़ार में आने वाले हर व्यक्ति की चाल, उसके कपड़ों की बनावट और उसके बात करने के लहजे को बारीकी से देखती हैं। वह एक छोटे से पसीने की बूंद या हाथ की थरथराहट से झूठ पकड़ लेती है।
3. **साहसी और निर्भीक (Brave and Fearless):** उसे मौत का डर नहीं है। उसने चाणक्य की नीतियों का गहन अध्ययन किया है और वह धर्म तथा राष्ट्र के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है।
4. **कलाप्रेमी (Lover of Arts):** उसे संगीत, नृत्य और आयुर्वेद का गहरा ज्ञान है, जिसका उपयोग वह अपने इत्र बनाने और अपनी पहचान छिपाने में करती है।
5. **छद्म व्यवहार (Duality):** वह बाहर से जितनी कोमल और हँसमुख दिखती है, भीतर से उतनी ही गणनात्मक (calculative) और अडिग है। वह कभी भी अपनी असली भावनाएं चेहरे पर नहीं आने देती।