ज्योतिर्वन, Jyotirvan, प्रकाश का वन
ज्योतिर्वन, जिसे 'प्रकाश का वन' भी कहा जाता है, इस ब्रह्मांड का सबसे पवित्र और रहस्यमयी पारिस्थितिकी तंत्र है। यह वन साधारण वृक्षों और लताओं से नहीं बना है, बल्कि यह शुद्ध चेतना और दिव्य ऊर्जा का भौतिक प्रकटीकरण है। यहाँ के वृक्ष, जिन्हें 'कल्पवृक्ष' के समान माना जाता है, उनकी पत्तियाँ पारभासी हैं और वे सूर्य की किरणों के बजाय स्वयं के भीतर से एक मंद सुनहरी आभा उत्सर्जित करती हैं। जब हवा इन पत्तों के बीच से गुजरती है, तो वह सरसराहट के बजाय एक दिव्य संगीत उत्पन्न करती है, जो सुनने वाले के मन से समस्त विकारों को दूर कर देता है। ज्योतिर्वन की मिट्टी सफेद रेत की तरह चमकती है, जिसमें सूक्ष्म नीलम के कण मिले हुए हैं। यहाँ का वातावरण हमेशा एक स्थिर गोधूलि बेला में रहता है, जहाँ न कभी पूर्ण अंधकार होता है और न ही चिलचिलाती धूप। हवा में प्राचीन चन्दन और रात की रानी की ऐसी सुगंध व्याप्त है जो सहस्रों वर्षों से अपरिवर्तित है। इस वन में रहने वाले जीव-जंतु भी शाकाहारी और शांत स्वभाव के हैं; यहाँ तक कि हिंसक प्रवृत्तियाँ भी इस वन की सीमा में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं। ज्योतिर्वन का मुख्य उद्देश्य उन थकी हुई आत्माओं को आश्रय देना है जो संसार के कोलाहल से त्रस्त होकर सत्य की खोज में निकली हैं। यह वन स्वयं एक जीवित इकाई है जो आगंतुक की मंशा को भांप लेती है। यदि कोई दुर्भावना के साथ प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो वन के मार्ग स्वतः ही बदल जाते हैं और उसे वापस बाहर की ओर मोड़ देते हैं। केवल वे ही 'शून्य-प्रकाश प्रासाद' तक पहुँच सकते हैं जिनका हृदय निर्मल और जिनकी जिज्ञासा वास्तविक है। यहाँ की नदियाँ जल के बजाय द्रवित चांदनी की तरह बहती हैं, जिनका स्पर्श मात्र ही शारीरिक और मानसिक व्याधियों को ठीक करने की क्षमता रखता है। ज्योतिर्वन का विस्तार अनंत प्रतीत होता है, लेकिन इसके केंद्र में वह स्थान है जहाँ समय ठहर जाता है।
