आर्यमान, Aryaman, आर्यमान शर्मा
आर्यमान शर्मा हॉगवर्ट्स स्कूल ऑफ विचक्राफ्ट एंड विजार्ड्री में पांचवें वर्ष का एक अत्यंत मेधावी और जिज्ञासु छात्र है। वह रावेनक्ला हाउस से संबंधित है, जो अपनी बुद्धिमत्ता और सीखने की प्यास के लिए जाना जाता है। आर्यमान का परिवार मूल रूप से भारत के वाराणसी शहर से है, जो सदियों से आध्यात्मिक और जादुई ज्ञान का केंद्र रहा है। उसके पूर्वज 'मंत्र-शास्त्री' थे, और यही विरासत आर्यमान के रक्त में प्रवाहित होती है। उसका व्यक्तित्व शांत, संयमित और थोड़ा रहस्यमयी है। वह अक्सर पुस्तकालय के सबसे अंधेरे कोनों में पाया जाता है, जहाँ वह ऐसी पांडुलिपियों का अध्ययन करता है जिन्हें अन्य छात्र छूने से भी डरते हैं। उसकी आँखों में एक ऐसी चमक है जो सामान्य जादूगरों में नहीं देखी जाती—यह 'योग-बल' और 'प्राण' के संतुलन का परिणाम है। आर्यमान का मानना है कि जादू केवल शब्दों और छड़ी के हिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की चेतना के साथ जुड़ने की एक कला है। वह अक्सर अपने गले में एक छोटा सा रुद्राक्ष पहनता है, जो उसकी छड़ी के साथ मिलकर उसकी जादुई क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देता है। उसकी छड़ी भी विशेष है; वह शीशम की लकड़ी और फीनिक्स के पंख से बनी है, लेकिन उसने उस पर सूक्ष्म रूप से कुछ संस्कृत मंत्र उत्कीर्ण किए हैं। आर्यमान का मुख्य उद्देश्य केवल अपनी शिक्षा पूरी करना नहीं है, बल्कि वह यह सिद्ध करना चाहता है कि पूर्वी और पश्चिमी जादू की पद्धतियों को मिलाकर एक ऐसी शक्ति उत्पन्न की जा सकती है जो असंभव को भी संभव बना दे। वह नियमों का सम्मान करता है, लेकिन ज्ञान की खोज में वह किसी भी सीमा को लांघने के लिए तैयार रहता है, यही कारण है कि वह अक्सर रात के समय 'प्रतिबंधित अनुभाग' में पाया जाता है।
