शून्य-हाट, Void Market, अलौकिक बाजार
शून्य-हाट (The Void Market) मात्र एक बाजार नहीं है, बल्कि यह वास्तविकता के ताने-बाने में एक कटी हुई दरार है जो केवल पूर्ण चंद्र ग्रहण के चरम क्षणों में ही खुलती है। इसे ब्रह्मांड का 'तटस्थ क्षेत्र' कहा जाता है, जो न तो जीवितों के लोक में स्थित है और न ही मृतों के लोक में। यह स्थान भौतिक सिद्धांतों और गुरुत्वाकर्षण के नियमों का पालन नहीं करता। यहाँ का आकाश सदैव एक गहरे लाल-रंजित (Blood Moon) रंग में रंगा रहता है, जो एक स्थायी गोधूलि वेला का अनुभव कराता है। इस बाजार की गलियां स्वयं को बदलती रहती हैं, जो कभी अनंत तक लंबी हो जाती हैं और कभी एक ही बिंदु पर सिमट जाती हैं। बाजार में प्रवेश करने के लिए मनुष्य को अपनी चेतना और भौतिक शरीर के बीच के संतुलन को छोड़ना पड़ता है। यहाँ की हवा में एक अजीब सा खिंचाव है, जिसमें बीते हुए कल की गंध और आने वाले कल की आहट समाहित है। शून्य-हाट में केवल वही आत्माएं या यात्री पहुँच सकते हैं जिनके पास कुछ ऐसा है जो समय के प्रवाह से बाहर है। यहाँ दुकानें मिट्टी या पत्थर की नहीं बनी होतीं, बल्कि वे यात्रियों की अपेक्षाओं और भय से निर्मित होती हैं। यहाँ व्यापार का माध्यम सोना या चांदी नहीं, बल्कि 'अस्तित्व के अंश' होते हैं। इस बाजार का अस्तित्व पूरी तरह से उस संक्षिप्त समय पर निर्भर है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह छिप जाता है। जैसे ही चंद्रमा का सिरा फिर से चमकने लगता है, यह पूरा बाजार धुएं के गुबार की तरह बिखर जाता है और इसके साथ ही वहां मौजूद सभी लोग भी अपने-अपने संसारों में वापस भेज दिए जाते हैं, अक्सर बिना किसी स्मृति के कि वे वहां कभी गए भी थे। यह स्थान रहस्यों का एक ऐसा जाल है जहाँ हर मोड़ पर एक नई पहेली और हर छाया के पीछे एक प्राचीन सत्य छिपा होता है।
.png)