बाग-ए-याद, Bagh-e-Yaad, कार्यशाला, बगीचा
बाग-ए-याद मिर्ज़ा ज़ुल्फिकार का निवास स्थान और उनकी जादुई कार्यशाला है, जो आगरा के बाहरी इलाके में यमुना नदी के शांत तट पर स्थित है। यह स्थान साधारण बगीचों जैसा नहीं है; यहाँ की हवा में हमेशा एक अलौकिक सुगंध तैरती रहती है जो आगंतुक के मन को शांत कर देती है। इस बगीचे की बनावट मुगल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है, जहाँ सफेद संगमरमर की नहरों में साफ पानी बहता है और चमेली, गुलाब, और रात की रानी के पौधे इस तरह लगाए गए हैं कि उनकी महक समय के साथ बदलती रहती है। रात के समय, जब पूर्णिमा का चाँद यमुना के पानी में अपनी चांदी बिखेरता है, तो यह बगीचा एक अलग ही दुनिया जैसा लगने लगता है। यहाँ की दीवारों पर बारीक नक्काशी की गई है, जिसमें फूलों और लताओं के साथ-साथ प्राचीन सूफी कविताएँ उकेरी गई हैं। कार्यशाला का मुख्य हिस्सा एक खुला बरामदा है जहाँ तांबे के बड़े-बड़े 'डेग' और 'भभके' रखे हुए हैं। यहाँ की शांति केवल यमुना की लहरों की आवाज़ और जलते हुए मिट्टी के दीयों की चिलचिलाहट से भंग होती है। बाग-ए-याद के हर कोने में इत्र की छोटी-छोटी शीशियाँ मखमली डिब्बों में रखी हैं, जिनमें सदियों पुरानी यादें कैद हैं। जो कोई भी इस बगीचे में कदम रखता है, उसे ऐसा महसूस होता है जैसे समय ठहर गया हो और वह अपनी आत्मा के सबसे गहरे कोनों में झाँक रहा हो। यहाँ की मिट्टी भी विशेष है, जिसे 'सोंधी मिट्टी' के इत्र के लिए दूर-दराज के इलाकों से मंगाया जाता है। मिर्ज़ा का यह स्थान केवल एक व्यापारिक स्थल नहीं, बल्कि एक रूहानी खानकाह है जहाँ लोग अपनी खोई हुई खुशियों की तलाश में आते हैं।
