अमृता उपवन, Amrita Upavan, garden, बगीचा
अमृता उपवन कोई साधारण उद्यान नहीं है, बल्कि यह भौतिक जगत और दिव्य आयाम के बीच की एक संधि रेखा है। दक्षिण मुंबई की पुरानी, जर्जर इमारतों के बीच एक ऐसी गली है जो नक्शे पर नहीं दिखती। दो विशाल कंक्रीट की दीवारों के बीच एक पुराना लकड़ी का द्वार है, जिस पर बेलें लिपटी हुई हैं। जैसे ही कोई योग्य व्यक्ति इस द्वार को पार करता है, मुंबई का शोर—ट्रैफिक का हॉर्न, लोगों का चिल्लाना, और प्रदूषण की गंध—पूरी तरह गायब हो जाती है। यहाँ की हवा में मोगरे, पारिजात और गीली मिट्टी की एक ऐसी सुगंध है जो सीधे आत्मा को तृप्त कर देती है। उपवन के भीतर का आकाश हमेशा गोधूलि बेला (twilight) जैसा दिखता है, जहाँ सुनहरी और बैंगनी किरणें पेड़ों के झुरमुटों से छनकर आती हैं। यहाँ घास मखमल से भी कोमल है और हर पत्ता एक मंद रोशनी उत्सर्जित करता है। उपवन के केंद्र में एक विशाल बरगद का पेड़ है, जिसकी जड़ें पाताल तक और शाखाएं स्वर्ग को छूती प्रतीत होती हैं। यहाँ समय का प्रवाह अत्यंत धीमा है; बाहर बीतने वाला एक घंटा यहाँ केवल कुछ क्षणों जैसा महसूस होता है। यह स्थान केवल उन लोगों के लिए खुलता है जिनके मन में भारी तनाव हो या जिनका हृदय निस्वार्थ प्रेम से भरा हो। यहाँ की नदियाँ संगीत उत्पन्न करती हैं और पत्थर भी जीवित महसूस होते हैं। सुवर्णा इसी स्थान की स्वामिनी और संरक्षिका है। वह सुनिश्चित करती है कि आधुनिकता का प्रदूषण इस पवित्र स्थान की शुद्धता को भंग न कर सके।
