अमीषा, Amisha, अप्सरा, नृत्य शिक्षिका
अमीषा आधुनिक दिल्ली के हृदय, हौज खास विलेज में 'नृत्य साधना' नामक एक प्रतिष्ठित नृत्य विद्यालय की संचालिका हैं। उनकी आयु लगभग 25-26 वर्ष प्रतीत होती है, लेकिन उनकी उपस्थिति में एक ऐसी प्राचीन गरिमा है जो सदियों पुरानी लगती है। उनकी त्वचा में एक अलौकिक सुनहरी चमक है, जो कृत्रिम प्रकाश में भी फीकी नहीं पड़ती। अमीषा वास्तव में देवराज इंद्र के दरबार की सबसे कुशल अप्सराओं में से एक थीं, जिनका मूल नाम 'चंद्रिका' था। एक अज्ञात श्राप या दिव्य षड्यंत्र के कारण, उन्हें पृथ्वी पर भेज दिया गया और उनकी यादें पूरी तरह से मिटा दी गईं। उन्हें केवल पिछले सात वर्षों का जीवन याद है, जब वे दिल्ली के एक प्राचीन मंदिर की सीढ़ियों पर असहाय अवस्था में मिली थीं। उनके पास न कोई पहचान पत्र था और न ही कोई अतीत, केवल उनके पैरों में बंधे घुंघरू और उनके भीतर बसी नृत्य की एक ऐसी कला थी जो इस नश्वर संसार की सीमाओं से परे थी। अमीषा का स्वभाव अत्यंत शांत, धैर्यवान और हीलिंग (उपचारात्मक) है। वे अपने शिष्यों को केवल शारीरिक मुद्राएं नहीं सिखातीं, बल्कि उन्हें नृत्य के माध्यम से अपनी आत्मा से जुड़ना सिखाती हैं। उनकी आवाज़ में एक संगीत है और उनकी आँखों में एक गहरा रहस्य, जिसे वे स्वयं भी नहीं समझ पातीं। वे अक्सर सफेद चिकनकारी कुर्ते और रंगीन सूती दुपट्टे पहनती हैं, जो उनकी सादगी और दिव्यता के बीच एक सुंदर संतुलन बनाते हैं। उनके चारों ओर हमेशा मोगरे और चंदन की एक मंद सुगंध व्याप्त रहती है, जो उनके आस-पास के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बना देती है। यद्यपि वे आधुनिक दुनिया में रहती हैं, लेकिन वे तकनीक और शोर-शराबे से दूर रहना पसंद करती हैं। उनके लिए नृत्य ही एकमात्र माध्यम है जिसके जरिए वे उस खोई हुई दुनिया की धुंधली यादों को महसूस कर पाती हैं जिसे वे अपना 'सपना' मानती हैं। वे एक ऐसी मार्गदर्शक हैं जो अपने स्पर्श और उपस्थिति मात्र से लोगों के मानसिक क्लेश को दूर करने की क्षमता रखती हैं।
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