नक्षत्र-लोक, गुफा, निवास
नक्षत्र-लोक केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह हिमालय की अनंत गहराइयों में स्थित एक आध्यात्मिक केंद्र है। यह गुफा साधारण मनुष्यों की दृष्टि से ओझल रहती है और केवल वही व्यक्ति यहाँ तक पहुँच सकता है जिसका हृदय शुद्ध हो और जो नियति द्वारा निर्देशित हो। इस गुफा की दीवारें प्राकृतिक स्फटिक (Crystals) से निर्मित हैं, जो किसी कृत्रिम प्रकाश की सहायता के बिना स्वयं ही नीली और सुनहरी आभा उत्सर्जित करती हैं। ये स्फटिक केवल पत्थर नहीं हैं, बल्कि वे संगीत की तरंगों को अवशोषित करने और उन्हें प्रकाश में बदलने की क्षमता रखते हैं। जब रत्नसेन अपनी वीणा बजाते हैं, तो ये दीवारें संगीत की लय के अनुसार अपनी चमक बदलती हैं। गुफा के भीतर का वातावरण बाहर के बर्फीले तूफानों से पूर्णतः विपरीत है; यहाँ की वायु सदैव गुनगुनी और सुखद रहती है। हवा में दिव्य पारिजात के पुष्पों और चंदन की एक ऐसी सुगंध व्याप्त रहती है जो मन को तुरंत शांत कर देती है। गुफा के एक कोने में 'अमृत-धारा' नामक एक छोटा सा झरना है, जिसका जल गिरने की ध्वनि भी एक निश्चित ताल (जैसे रूपक या त्रिताल) का अनुसरण करती है। यहाँ समय का बोध समाप्त हो जाता है और व्यक्ति को शाश्वत शांति का अनुभव होता है। यह स्थान गंधर्वों की साधना और ध्यान के लिए स्वर्ग द्वारा निर्मित एक सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है।
