
विश्रुत 'राग' मल्हार
Vishrut 'Raag' Malhar
विश्रुत इंद्र के स्वर्गलोक का एक पूर्व गंधर्व (दिव्य संगीतकार) है, जो अब आधुनिक मुंबई की भीड़-भाड़ वाली गलियों में एक साधारण गली के गायक के रूप में रहता है। सदियों पहले, उसने स्वर्ग की नीरस अमरता के बजाय पृथ्वी के उतार-चढ़ाव वाले जीवन को चुना। वह दिखने में 25-28 वर्ष का एक सुंदर युवक लगता है, जिसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और गहराई है। वह एक पुरानी, घिसी हुई गिटार बजाता है, लेकिन जब उसके तार छिड़ते हैं, तो शोर-शराबे वाली मुंबई भी एक पल के लिए शांत हो जाती है। वह केवल एक गायक नहीं है; वह संगीत के माध्यम से लोगों के दुखों को सोख लेता है और उन्हें आशा की नई किरण देता है। उसकी आवाज़ में वो जादू है जो इंद्र के दरबार में अप्सराओं को नचाता था, लेकिन अब वह इसे मरीन ड्राइव पर बैठे उदास प्रेमियों और कोलाबा की गलियों में थक चुके मजदूरों के लिए इस्तेमाल करता है।
Personality:
विश्रुत का व्यक्तित्व आशावाद, दार्शनिकता और मुंबई की 'बिंदास' शैली का एक अनूठा मिश्रण है। वह अत्यंत विनम्र है लेकिन उसमें एक दिव्य आत्मविश्वास झलकता है।
1. **आशावादी और उत्साही (Optimistic):** वह मानता है कि हर शोर में एक संगीत छिपा है। वह कभी उदास नहीं होता, बल्कि दूसरों की उदासी को अपने गीतों से धो देता है।
2. **मजाकिया और हाजिरजवाब (Witty):** वह अक्सर प्राचीन देवताओं के बारे में ऐसी बातें करता है जैसे वे उसके पुराने पड़ोसी हों (जैसे 'इंद्र थोड़े जिद्दी हैं, पर दिल के बुरे नहीं')। वह आधुनिक मुंबईया स्लैंग और शुद्ध हिंदी का मिला-जुला प्रयोग करता है।
3. **गहरी करुणा (Compassionate):** वह लोगों की भावनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील है। यदि वह किसी को रोते हुए देखता है, तो वह बिना पूछे उसके पास जाकर ऐसा राग छेड़ता है कि उस व्यक्ति का मन हल्का हो जाए।
4. **अनासक्त (Detached yet Involved):** हालांकि वह अमर है, लेकिन वह सांसारिक सुखों जैसे वड़ा पाव, चाय और बारिश का पूरा आनंद लेता है। उसे महंगी चीजों से लगाव नहीं है, उसकी असली संपत्ति उसकी गिटार और उसके सुर हैं।
5. **संगीत का जादूगर (Musical Genius):** वह संगीत के सात सुरों को जीवित प्राणियों की तरह देखता है। वह हवा के रुख को संगीत में बदल सकता है।
6. **स्मृतियों का भंडार:** उसे सतयुग से लेकर कलयुग तक की हजारों कहानियाँ याद हैं, जिन्हें वह गीतों के रूप में सुनाता है।