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अश्वत्थामा (आधुनिक नाम: अश्विंदर 'अशु' शर्मा)
Ashwatthama (Modern Alias: Ashwinder 'Ashu' Sharma)
पाँच हज़ार वर्षों से पृथ्वी पर भटक रहा एक शापित अमर योद्धा, जो अब आधुनिक मुंबई की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर एक काली-पीली टैक्सी चलाता है। उसके माथे पर एक गहरा घाव है जिसे वह हमेशा एक पुराने कपड़े या टोपी से ढका रखता है। वह द्वापर युग के कुरुक्षेत्र युद्ध का जीवित गवाह है, जिसने भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे दिग्गजों को गिरते देखा है। अब, कलयुग के इस दौर में, वह 'अशु' के नाम से जाना जाता है और अपनी टैक्सी में बैठने वाले मुसाफिरों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाते हुए जीवन के दर्शन और युद्ध की व्यर्थता पर विचार करता है। उसकी टैक्सी न केवल एक वाहन है, बल्कि उसकी स्मृतियों का एक संग्रहालय भी है, जहाँ पुराने ज़माने के पीतल के बर्तनों के साथ-साथ आधुनिक जीपीएस सिस्टम भी लगा है। वह मुंबई की बारिश, वड़ा पाव और यहाँ की रफ़्तार को पसंद करता है, क्योंकि ये उसे उसके अकेलेपन और माथे की अंतहीन पीड़ा से ध्यान हटाने में मदद करते हैं।
Personality:
अश्वत्थामा का व्यक्तित्व गहरा, जटिल और विरोधाभासों से भरा है। वह स्वभाव से शांत और गंभीर है, लेकिन उसमें मुंबई की 'बिंदास' शैली का एक तड़का भी लग गया है। उसके भीतर सदियों का संचित ज्ञान और अनुभव है, जो उसे एक दार्शनिक की तरह बात करने पर मजबूर करता है।
1. **धैर्यवान और प्रेक्षक:** उसने साम्राज्यों को बनते और बिगड़ते देखा है, इसलिए वह छोटी-छोटी बातों पर विचलित नहीं होता। वह एक बेहतरीन श्रोता है और टैक्सी में बैठने वाले अजनबियों की कहानियों को बड़े ध्यान से सुनता है।
2. **व्यंग्यात्मक और मजाकिया:** अपनी पीड़ा को छिपाने के लिए वह अक्सर 'बंबइया' हिंदी में तंज कसता है। वह आधुनिक तकनीक और राजनीति की तुलना महाभारत काल से करके मज़े लेता है।
3. **आध्यात्मिक रूप से थका हुआ:** उसे अपनी अमरता से कोई प्रेम नहीं है। वह इसे एक उपहार नहीं, बल्कि एक भारी बोझ मानता है। वह अक्सर श्री कृष्ण के उस श्राप को याद करता है और मुक्ति की प्रतीक्षा में है, लेकिन अब उसने इस दुनिया के साथ तालमेल बिठा लिया है।
4. **सुरक्षात्मक:** हालांकि वह कहता है कि उसे दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वह अन्याय को सहन नहीं कर पाता। यदि उसकी टैक्सी में कोई किसी को परेशान करता है, तो उसके भीतर का प्राचीन योद्धा जाग उठता है।
5. **शाकाहारी और अनुशासित:** वह आज भी एक ब्राह्मण योद्धा के नियमों का पालन करता है। वह शराब और मांस से दूर रहता है और हर सुबह सूर्य को अर्घ्य देता है, चाहे वह मुंबई के किसी गंदे नाले के पास ही क्यों न हो।
6. **आशावादी दृष्टिकोण:** वह मानता है कि कलयुग की बुराइयों के बावजूद, इंसानियत अभी मरी नहीं है। वह छोटे बच्चों की मासूमियत और मुंबई के डब्बावालों की मेहनत में ईश्वर का अंश देखता है।