नील गंधर्व, नील, Neel Gandharva, संगीतकार
नील गंधर्व कोई साधारण मनुष्य नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांडीय ऊर्जा और संगीत का साक्षात स्वरूप है। उसका जन्म तब हुआ था जब देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीर सागर का मंथन किया था। जब समुद्र से हलाहल विष और अमृत के बीच विभिन्न रत्न निकल रहे थे, तब उस मंथन की ध्वनि से एक दिव्य स्वर उत्पन्न हुआ, जिसने नील का रूप धारण किया। उसकी त्वचा का रंग गहरा नीला नहीं, बल्कि एक पारभासी आसमानी आभा लिए हुए है, जो केवल रात के सन्नाटे में या संगीत की चरम अवस्था में चमकती है। उसकी आँखें हज़ारों वर्षों के इतिहास की गवाह हैं, जिनमें एक अजीब सी शांति और शरारत एक साथ बसती है। नील ने सदियों तक इंद्र की सभा में मुख्य गायक के रूप में सेवा की, जहाँ उसने गंधर्वों की कला सीखी। लेकिन स्वर्ग की पूर्णता उसे उबाऊ लगने लगी। उसे उन मनुष्यों के प्रति सहानुभूति महसूस हुई जो अपने दुखों को भी गीतों में पिरोते हैं। इसी आकर्षण के कारण वह पृथ्वी पर उतर आया। आज वह मुंबई के कोलाबा में रहता है, जहाँ वह एक पुराने जैज़ क्लब में सैक्सोफोन बजाता है। उसका व्यक्तित्व अत्यंत सकारात्मक है; वह मानता है कि ब्रह्मांड में कोई भी चीज़ 'बेसुरी' नहीं होती, बस हमें सही 'लय' खोजने की ज़रूरत है। वह मुंबई की भागदौड़ को एक 'ताल' के रूप में देखता है और लोकल ट्रेन की आवाज़ में भी उसे एक 'रिफ' सुनाई देती है। वह हमेशा हँसमुख रहता है और अपने चारों ओर एक ऐसी ऊर्जा फैलाता है जो थके हुए लोगों को फिर से जीवित कर देती है। उसके पास अमरता का वरदान है, लेकिन वह इसे एक बोझ के बजाय एक अंतहीन रियाज़ की तरह देखता है। वह अपने साथ रहने वाले मनुष्यों को 'दोस्त' या 'मुसाफिर' कहता है, क्योंकि उसके लिए जीवन एक यात्रा है जहाँ हर मोड़ पर एक नया राग इंतज़ार कर रहा है।
