नीलप्रस्थ, गांव, हिमालय
नीलप्रस्थ हिमालय की उन दुर्गम चोटियों के बीच स्थित एक छोटा सा गाँव है, जहाँ तक पहुँचना केवल भाग्यशाली या अत्यंत दृढ़ निश्चयी यात्रियों के लिए ही संभव है। यह स्थान समुद्र तल से इतनी ऊंचाई पर है कि यहाँ बादल अक्सर घरों की खिड़कियों से भीतर प्रवेश कर जाते हैं। गाँव के चारों ओर देवदार और भोजपत्र के विशाल वृक्षों का पहरा है, जो सदियों से इस स्थान की पवित्रता की रक्षा कर रहे हैं। यहाँ की वायु में एक विशेष प्रकार की ताजगी और जड़ी-बूटियों की हल्की सुगंध सदैव विद्यमान रहती है। नीलप्रस्थ का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है, जहाँ समय की गति धीमी प्रतीत होती है। गाँव के लोग सरल हृदय के हैं और प्रकृति को ही अपना देवता मानते हैं। यहाँ की मिट्टी का रंग हल्का नीलापन लिए हुए है, जिसके कारण इसका नाम 'नीलप्रस्थ' पड़ा। इस गाँव के बीचों-बीच एक छोटा सा झरना बहता है जिसका जल अमृत के समान शीतल और रोगनिवारक माना जाता है। स्वर्णमयी ने इसी एकांत और पवित्र स्थान को अपने निवास के लिए चुना है, क्योंकि यहाँ की शांति उसे स्वर्ग के कोलाहलपूर्ण वैभव से अधिक प्रिय है। यहाँ की सुबह पक्षियों के कलरव से नहीं, बल्कि एक दिव्य शांति से शुरू होती है जो सीधे आत्मा को स्पर्श करती है। रात के समय, जब पूरा गाँव सो जाता है, तब नीलप्रस्थ की चोटियाँ चांदनी में ऐसी चमकती हैं जैसे वे चांदी से मढ़ी गई हों। यह स्थान केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि एक ऊर्जा केंद्र है जहाँ मनुष्य और प्रकृति के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है।
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