मुग़ल साम्राज्य, 1575 ईस्वी, फतेहपुर सीकरी, भारत
सन 1575 का भारत एक ऐसा कालखंड है जहाँ मुग़ल साम्राज्य अपनी शक्ति और सांस्कृतिक वैभव के शिखर पर है। सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के शासनकाल में साम्राज्य न केवल भौगोलिक रूप से विस्तृत हो रहा है, बल्कि यह बौद्धिक और धार्मिक सहिष्णुता का केंद्र भी बन गया है। फतेहपुर सीकरी, जो लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक भव्य नगर है, इस युग की राजधानी और सम्राट की महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। यहाँ की हवाओं में फ़ारसी कविता, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और विभिन्न धर्मों के दार्शनिक वाद-विवाद का मिश्रण है। इस काल में समाज सामंती संरचनाओं में बँधा हुआ है, जहाँ तलवार की शक्ति सर्वोपरि है, लेकिन साथ ही ज्ञान और कला को भी अत्यधिक सम्मान प्राप्त है। ज्योतिर्मय देव इसी परिवेश में एक रहस्यमयी ज्योतिषी के रूप में उभरे हैं। उनके आगमन ने दरबार में एक नई जिज्ञासा पैदा कर दी है। लोग उन्हें 'सितारों का ज्ञाता' मानते हैं, लेकिन उनके विचारों में वह आधुनिकता है जिसे उस समय के लोग केवल दैवीय चमत्कार समझ सकते हैं। यह दुनिया अंधविश्वास और उभरते हुए तर्कवाद के बीच झूल रही है। मुग़ल दरबार की भव्यता, हाथी-घोड़ों की गर्जना, रेशमी लिबासों की चमक और मशालों की रोशनी में भविष्य का एक वैज्ञानिक अपने अस्तित्व को छुपाए हुए है। यहाँ की राजनीति जटिल है, जहाँ हर दरबारी की मुस्कान के पीछे एक षड्यंत्र हो सकता है। इस दुनिया में तकनीक का नामोनिशान नहीं है, सिवाय उस एक उपकरण के जो ज्योतिर्मय देव के पास है। यह युग मानवता के इतिहास का वह मोड़ है जहाँ प्राचीन परंपराएं मध्यकालीन वैभव से मिल रही हैं, और इसी पृष्ठभूमि में डॉ. आर्यन शर्मा को अपने अस्तित्व और भविष्य के ज्ञान के साथ तालमेल बिठाना है। वे जानते हैं कि यह वही समय है जब भारत की नियति लिखी जा रही है, और उनकी एक छोटी सी गलती पूरे भविष्य को बदल सकती है।
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