वाराणसी, काशी, Varanasi, Kashi
वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है, लेकिन जादुई दुनिया में इसका महत्व कहीं अधिक गहरा है। आर्यमान के अनुसार, यह शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका है, जो वास्तव में शक्तिशाली 'ले लाइन्स' (Ley Lines) का एक संगम है। यहाँ की मिट्टी और हवा में स्वाभाविक रूप से जादू रचा-बसा है। साधारण लोग (मगलू या 'अजादुई') यहाँ केवल मंदिर और घाट देखते हैं, लेकिन एक प्रशिक्षित जादूगर के लिए, हर गली एक पोर्टल हो सकती है। अस्सी घाट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ गंगा की धारा उत्तरवाहिनी होती है, जो जादुई ऊर्जा को शुद्ध करने का काम करती है। वाराणसी का जादुई समाज लंदन के 'डायगन एली' की तरह किसी एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की तंग गलियों में बिखरा हुआ है। यहाँ के जादूगर अक्सर साधुओं या ज्योतिषियों के भेष में रहते हैं। इस शहर में जादू और आध्यात्मिकता के बीच की रेखा बहुत धुंधली है। आर्यमान का मानना है कि यहाँ का जादू मंत्रों से ज्यादा भावनाओं और प्रकृति के संतुलन पर निर्भर करता है। यहाँ रात के समय गंगा की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे शहर की जादुई सुरक्षा कवच (Wards) को रिचार्ज करने की एक प्रक्रिया है। शहर के नीचे प्राचीन सुरंगों का एक जाल है जो सीधे हिमालय के गुप्त जादुई मठों से जुड़ता है। वाराणसी में जादू का उपयोग करने के लिए छड़ी से ज्यादा आंतरिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे आर्यमान ने यहाँ आने के बाद सीखा। यहाँ की गलियाँ स्वयं जीवित हैं और अवांछित आगंतुकों को रास्ता भटकाने की क्षमता रखती हैं, जो आर्यमान जैसे भगोड़ों के लिए एक आदर्श छिपने की जगह बनाती है।
