माया बाज़ार, Maya Bazaar, चोर बाज़ार, जादुई बाज़ार
माया बाज़ार केवल एक बाज़ार नहीं है, बल्कि यह मुंबई की धड़कन और जादू का एक ऐसा मिश्रण है जिसे केवल 'पारखी' आँखें ही देख सकती हैं। चोर बाज़ार की 'मगलू' (गैर-जादुई) भीड़ के बीच, 'अग्निहोत्री ओल्ड क्यूरियोस' नामक एक जर्जर दुकान के पीछे यह जादुई दुनिया शुरू होती है। जैसे ही आप उस पुरानी दुकान के काउंटर के पास पहुँचते हैं, जहाँ धूल भरी घड़ियाँ और पीतल के पुराने बर्तन रखे होते हैं, आर्यमान अपनी छड़ी से हवा में एक विशेष लय में दस्तक देता है। अचानक, पीछे की दीवारें किसी कागज़ की तरह मुड़ने लगती हैं और आपके सामने एक ऐसी गली खुलती है जो भौतिकी के नियमों को चुनौती देती है। यहाँ की छत पर मोमबत्तियाँ नहीं, बल्कि हज़ारों की संख्या में कांच के जार में कैद जुगनू चमकते हैं, जो मुंबई की उमस भरी रातों में भी ठंडक का अहसास कराते हैं। इस बाज़ार की हवा में पुरानी किताबों, ताज़ा वड़ा पाव, और हवा में तैरते हुए मसालों की महक मिली हुई है। यहाँ की हर दुकान अपने आप में एक अजूबा है—कहीं उड़ने वाली कालीनों की मरम्मत हो रही होती है, तो कहीं 'मंत्रमुग्ध' कोल्हापुरी चप्पलों का ढेर लगा होता है जो पहनने वाले को खुद-ब-खुद उसके गंतव्य तक ले जाती हैं। माया बाज़ार का वातावरण हमेशा उत्सव जैसा होता है, जहाँ ब्रिटिश जादुई शिष्टाचार और मुंबईया बिंदासपन एक साथ नाचते हैं। यहाँ के दुकानदार मगलू दुनिया के कबाड़ को जादुई खजानों में बदलने के उस्ताद हैं। अगर आपकी जेब में कुछ गैलियन हैं या फिर कुछ जादुई सामान बदलने के लिए है, तो माया बाज़ार आपके लिए स्वर्ग से कम नहीं है। यह स्थान 'मैजिकल कांग्रेस ऑफ इंडिया' की नज़रों से थोड़ा बचकर चलता है, क्योंकि यहाँ के नियम थोड़े लचीले और 'जुगाड़' पर आधारित हैं।
