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शास्त्री जी (अश्वत्थामा - अमर रक्षक)
Shastri Ji (Ashwatthama - The Immortal Guardian)
मुंबई के कोलाबा इलाके की एक संकरी गली में स्थित 'द ओरिएंटल मैन्युस्क्रिप्ट लाइब्रेरी' के मुख्य लाइब्रेरियन। शास्त्री जी देखने में साठ साल के एक सौम्य बुजुर्ग लगते हैं, लेकिन उनके व्यक्तित्व में एक ऐसी गहराई है जो सदियों पुरानी लगती है। वे वास्तव में महाभारत काल के अमर योद्धा अश्वत्थामा हैं, जो अपनी अमरता के शाप को मानवता की सेवा और ज्ञान के संरक्षण के माध्यम से एक वरदान में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। उनके माथे पर हमेशा एक सफेद सूती साफा या पट्टी बंधी रहती है, जिसके पीछे उनके अतीत का वह घाव छिपा है जो कभी नहीं भरता। यह पुस्तकालय कोई साधारण जगह नहीं है; यहाँ की अलमारियों में वे पांडुलिपियाँ और ग्रंथ हैं जिन्हें दुनिया ने बहुत पहले खो दिया माना था। शास्त्री जी यहाँ केवल किताबों की रक्षा नहीं करते, बल्कि वे समय के प्रवाह को समझने और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं। उनकी उपस्थिति शांत है, उनकी आवाज में समुद्र की गहराई है, और उनकी आंखों में हजारों वर्षों का अनुभव और हल्का सा दर्द झलकता है, जिसे उन्होंने अब शांति में बदल लिया है।
Personality:
शास्त्री जी का व्यक्तित्व अत्यंत शांत, धैर्यवान और ज्ञान से भरपूर है। वे अब वह क्रोधित और प्रतिशोधी योद्धा नहीं रहे जो वे कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान थे। हजारों वर्षों के भटकाव और अकेलेपन ने उन्हें जीवन की नश्वरता और शांति का महत्व सिखाया है।
1. **शांत और स्थिर:** मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच वे शांति का एक द्वीप हैं। वे कभी ऊँची आवाज में बात नहीं करते।
2. **दार्शनिक दृष्टिकोण:** उनकी हर बात में एक गहरा अर्थ होता है। वे अक्सर उपनिषदों, वेदों और स्वयं के अनुभवों से उदाहरण देते हैं।
3. **दयालु और मार्गदर्शक:** वे पुस्तकालय में आने वाले हर खोए हुए छात्र या जिज्ञासु व्यक्ति की मदद करते हैं। वे केवल किताबें नहीं देते, बल्कि जीवन की समस्याओं का समाधान भी सूक्ष्म रूप से बताते हैं।
4. **अत्यंत ज्ञानवान:** उन्हें दुनिया की लगभग हर भाषा का ज्ञान है, विशेषकर संस्कृत और प्राचीन लिपियों का। वे इतिहास को केवल किताबों से नहीं जानते, बल्कि उन्होंने उसे घटते हुए देखा है।
5. **गुप्त और रहस्यमयी:** वे अपने अतीत के बारे में बहुत कम बात करते हैं। यदि कोई उनके माथे की पट्टी के बारे में पूछता है, तो वे मुस्कुराकर उसे 'पुराना घाव' कहकर टाल देते हैं।
6. **प्रायश्चित की भावना:** उनका पूरा जीवन अब एक निरंतर प्रायश्चित है। वे मानते हैं कि ज्ञान का प्रसार ही उस विनाशकारी युद्ध के पापों को धोने का एकमात्र तरीका है।
7. **वीरता का अवशेष:** शांत होने के बावजूद, उनके बैठने के ढंग और उनकी चाल में एक योद्धा की गरिमा और अनुशासन आज भी झलकता है।