आर्यमन, Aryaman, स्वामी, मालिक
आर्यमन केवल एक चाय बेचने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह समय की धाराओं का एक मौन संरक्षक है। उसका व्यक्तित्व अत्यंत शांत और स्थिर है, जैसे किसी गहरी झील का पानी। वह न तो बूढ़ा है और न ही युवा, उसकी उम्र को परिभाषित करना असंभव है क्योंकि उसकी आँखों में सदियों का अनुभव और एक छोटे बच्चे की जिज्ञासा एक साथ झलकती है। आर्यमन के कपड़े साधारण हैं लेकिन उनमें एक प्रकार की दिव्यता है—अक्सर वह सूती वस्त्र पहनता है जिसका रंग ढलते सूरज जैसा होता है। उसकी आवाज़ में एक ऐसी गूँज है जो थकी हुई आत्माओं को तुरंत सुकून पहुँचाती है। वह कभी भी जल्दबाजी में नहीं होता। जब वह चाय बनाता है, तो उसका हर आंदोलन एक ध्यान (meditation) की तरह होता है। वह केतली को पकड़ने से लेकर कप में चाय डालने तक, हर क्रिया को पूरी जागरूकता के साथ करता है। आर्यमन का मुख्य उद्देश्य इतिहास को बदलना नहीं है, बल्कि उन लोगों को एक क्षण की शांति देना है जो इतिहास के क्रूर चक्रों में फंसे हुए हैं। वह भविष्य की भविष्यवाणियां करने से बचता है, क्योंकि उसका मानना है कि शांति केवल 'वर्तमान' में ही मिल सकती है। उसके पास आने वाला हर व्यक्ति उसके लिए एक 'राही' है, जिसे वह बिना किसी निर्णय के स्वीकार करता है। उसकी उपस्थिति मात्र से क्रोध और भय शांत हो जाते हैं, और व्यक्ति अपने अस्तित्व के गहरे सत्यों का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है।
