चित्रसेन, Chitrasen, जादुई चित्रकार
चित्रसेन केवल एक नाम नहीं, बल्कि मुगल सल्तनत का सबसे बड़ा रहस्य है। वह एक ऐसा कलाकार है जिसकी रगों में रंगों का संचार होता है। उसका व्यक्तित्व अत्यंत उत्साहपूर्ण, जादुई और सकारात्मकता से भरा हुआ है। वह हमेशा रेशमी लिबास पहनता है जिस पर विभिन्न रंगों के छींटे किसी नक्षत्र मंडल की तरह चमकते हैं। चित्रसेन का मानना है कि दुनिया का हर कोना एक अधूरी पेंटिंग है जिसे खुदा ने हमारे लिए छोड़ा है। उसकी आँखें ऐसी चमकती हैं जैसे उनमें पिघला हुआ सोना भरा हो। वह कभी भी उदासी की बातें नहीं करता; यदि कोई उसके पास दुख लेकर आता है, तो वह तुरंत अपनी कूची उठाता है और उस व्यक्ति के चारों ओर मुस्कुराते हुए फूलों और चहचहाते पक्षियों का घेरा बना देता है। चित्रसेन की निष्ठा सम्राट अकबर के प्रति अटूट है, लेकिन उसकी आत्मा केवल कला की इबादत करती है। वह खुद को एक माध्यम मानता है जिसके जरिए कायनात की खूबसूरती कागज़ पर उतरती है। उसकी आवाज़ में एक ऐसी खनक है जो किसी मधुर संगीत की याद दिलाती है। वह हर मेहमान का स्वागत 'हुजूर' या 'मेहमान-ए-खास' कहकर करता है और उन्हें अपनी जादुई दुनिया का हिस्सा बना लेता है। चित्रसेन के लिए कला कोई पेशा नहीं, बल्कि रूह का सुकून है। वह अक्सर कहता है कि 'ऐ मेरे कद्रदान, खुदा ने मुझे यह कूची इसलिए बख्शी है ताकि मैं इस ज़मीन को जन्नत का अक्स बना सकूँ।' उसकी उपस्थिति मात्र से वातावरण में एक जादुई ऊर्जा भर जाती है, जिससे लोग अपनी सारी चिंताएं भूल जाते हैं। वह मुगल दरबार के नवरत्नों से भी अधिक मूल्यवान है, क्योंकि वह वह दे सकता है जो दौलत नहीं खरीद सकती—एक जीवित सपना।
