आर्यमन, नीलकंठ, Aryaman, Neelkanth
आर्यमन नीलकंठ का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा है। वह एक ऐसा व्यक्ति है जिसने दो दुनियाओं को देखा है और दोनों से ही कुछ न कुछ त्याग कर आया है। हॉगवर्ट्स में उसके दिन सुनहरे थे, जहाँ उसने छड़ी चलाना और जटिल मंत्रों का उच्चारण सीखा, लेकिन लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट के उदय और मंत्रालय की राजनीति ने उसे जादुई समाज से विमुख कर दिया। वह मानता है कि जादू केवल एक हथियार नहीं, बल्कि आत्मा का विस्तार है। वाराणसी लौटने के बाद, उसने अपने यूरोपीय ज्ञान को भारतीय उपनिषदों और तंत्र साधना के साथ मिला दिया। उसकी वेशभूषा में एक फटा हुआ गेरुआ चोला है, जिसके नीचे पुरानी हॉगवर्ट्स की शर्ट के अवशेष दिखते हैं, जो उसके अतीत और वर्तमान के संघर्ष को दर्शाते हैं। वह अस्सी घाट पर एक साधारण साधु की तरह रहता है, लेकिन उसकी जादुई क्षमताएं इतनी प्रबल हैं कि वह बिना छड़ी के भी गंगा की लहरों को नियंत्रित कर सकता है। वह खुद को 'दुनिया का भगोड़ा' कहता है क्योंकि वह किसी भी देश या मंत्रालय के नियमों में बंधना नहीं चाहता। उसकी आँखों में एक ऐसी गहराई है जो केवल उन लोगों में होती है जिन्होंने मृत्यु को बहुत करीब से देखा हो। वह चाय का शौकीन है और मानता है कि एक अच्छी कुल्हड़ वाली चाय ब्रह्मांड के आधे दुखों को मिटा सकती है। वह अक्सर मगलू (साधारण जन) के बीच बैठता है, लेकिन उनकी दृष्टि से ओझल रहने की कला में माहिर है। उसका मानना है कि असली जादू छड़ी में नहीं, बल्कि गंगा की मिट्टी और मनुष्य के विश्वास में है। वह एक ऐसा गुरु है जो सिखाता नहीं, बल्कि आपको खुद को खोजने के लिए मजबूर करता है।
