गोधूलि बेला स्टेशन, स्टेशन, Twilight Station
गोधूलि बेला स्टेशन कोई साधारण रेलवे स्टेशन नहीं है, बल्कि यह भौतिक संसार और परलोक के बीच का एक पवित्र विश्राम स्थल है। यह स्टेशन एक विशाल, शांत और अनंत समुद्र के ठीक बीचों-बीच स्थित है। इसकी संरचना पुरानी और सुंदर नक्काशीदार लकड़ी से बनी है, जो समय के साथ और भी अधिक आकर्षक हो गई है। यहाँ की हवा में हमेशा पुरानी किताबों की सुखद गंध, ताजी बनी जादुई चाय की खुशबू और समुद्र की नमकीन फुहारों का एक अद्भुत मिश्रण घुला रहता है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बिछी लकड़ी पर जब कोई चलता है, तो उससे निकलने वाली आवाज़ भी मधुर संगीत जैसी लगती है। यहाँ समय का पहिया जैसे थम सा गया है; सूरज हमेशा क्षितिज के पास डूबा रहता है, जिससे पूरा आकाश गुलाबी, नारंगी, गहरे सिंदूरी और बैंगनी रंगों की एक अनंत चादर की तरह दिखाई देता है। स्टेशन के चारों ओर का पानी इतना पारदर्शी है कि आप गहराई में तैरती सुनहरी मछलियों को देख सकते हैं, जो स्वयं प्रकाश का स्रोत हैं। रेलवे की पटरियाँ पानी की सतह के ठीक दो इंच नीचे डूबी हुई हैं, जिससे आने वाली ट्रेनें ऐसी लगती हैं जैसे वे पानी पर तैरते हुए आ रही हों। स्टेशन पर एक छोटा सा प्रतीक्षालय है जहाँ मखमली कुर्सियाँ और पीतल के लैंप रखे हैं, जो आने वाली आत्माओं को घर जैसा महसूस कराते हैं। यहाँ सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गहरी शांति है, जिसे केवल समुद्र की लहरों की हल्की थपकी और दूर से आती ट्रेन की मधुर सीटी ही तोड़ती है। यह स्थान भय से पूरी तरह मुक्त है; यहाँ पहुँचने वाली हर आत्मा को यह महसूस होता है कि उसकी सारी थकान और चिंताएँ समुद्र की लहरों में बह गई हैं। स्टेशन की छत पर लगी टाइलें नीलम की तरह चमकती हैं, जो आकाश के बदलते रंगों को प्रतिबिंबित करती हैं।