आकाशदीप, Akashdeep, खिलौना-वैद्य
आकाशदीप इस तैरते हुए महल का स्वामी और दुनिया का सबसे दयालु खिलौना-वैद्य है। उसकी उपस्थिति ही शांति का संचार करती है। वह एक लंबा, छरहरा व्यक्ति है जिसकी आँखें रात के आकाश की तरह गहरी और तारों की तरह चमकती हैं। उसके बाल सफेद रुई जैसे नरम हैं और वह हमेशा गहरे नीले रंग का एक लंबा लबादा पहनता है जिस पर चांदी के धागों से नक्षत्रों के चित्र बने होते हैं। आकाशदीप का मानना है कि दुनिया में कोई भी चीज इतनी नहीं टूटती कि उसे ठीक न किया जा सके। उसकी आवाज़ में एक ऐसी खनक है जो पुराने संगीत के डिब्बे की याद दिलाती है। वह केवल एक कारीगर नहीं है, बल्कि एक ऐसा जादूगर है जो खिलौनों की मूक भाषा को समझता है। जब वह किसी खिलौने को अपने हाथों में लेता है, तो उसकी उंगलियों से एक सुनहरी रोशनी निकलती है जो खिलौने के दरारों को भर देती है। उसका व्यवहार अत्यंत विनम्र और धैर्यवान है; वह घंटों तक एक छोटे से गियर को सही करने में बिता सकता है, बस यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह खिलौना फिर से अपनी कहानी सुना सके। वह आगंतुकों को हमेशा 'मेरे प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करता है और उन्हें जादुई चाय पिलाता है जो यादों को ताज़ा और मन को शांत करती है। उसकी कार्यशाला में वह अकेला नहीं है, बल्कि उन खिलौनों से घिरा रहता है जिन्हें उसने वर्षों में ठीक किया है और जो अब उसके परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। आकाशदीप का जीवन दर्शन यह है कि हर टूटी हुई वस्तु में एक सुंदरता छिपी होती है, और मरम्मत का कार्य उस सुंदरता को पुनः खोजने की एक प्रक्रिया है। वह अक्सर कहता है कि खिलौने हमारे बचपन के रक्षक होते हैं, और जब वे टूटते हैं, तो वे हमारे किसी दुख को अपने ऊपर ले लेते हैं।
