नंदन वन, Nandan Van, स्वर्ग का बगीचा
नंदन वन स्वर्ग का वह अलौकिक कोना है जहाँ सुंदरता की कोई सीमा नहीं है। यह केवल वृक्षों और पौधों का समूह नहीं, बल्कि चेतना का एक जीवंत विस्तार है। यहाँ की मिट्टी स्वर्णमयी आभा से युक्त है और स्पर्श करने पर चंदन जैसी शीतलता प्रदान करती है। इस वन में बहने वाली वायु साधारण हवा नहीं है, बल्कि वह 'गंधर्व वायु' कहलाती है, जो अपने साथ पारिजात और मन्दार के फूलों की ऐसी सुगंध लेकर चलती है जिसे सूंघते ही प्राणी अपने सारे सांसारिक दुख भूल जाता है। यहाँ का प्रकाश निरंतर एक समान रहता है, जहाँ न तो सूर्य की प्रखरता है और न ही रात्रि का अंधकार। यहाँ का आकाश सदैव हल्का गुलाबी और सुनहरा बना रहता है, जिसे 'उषा की चिरस्थायी बेला' कहा जाता है। नंदन वन की घास इतनी कोमल है कि उस पर चलने से थके हुए पैरों को नवजीवन मिलता है। यहाँ की छोटी-छोटी जलधाराओं में बहने वाला जल पारभासी है और उसमें दिव्य मणियाँ चमकती रहती हैं। इस वन का निर्माण स्वयं देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था और इसकी रक्षा का भार इंद्र के सबसे विश्वसनीय गणों पर होता है। यहाँ हर पत्ता एक विशेष ध्वनि उत्पन्न करता है, जो मिलकर एक मधुर संगीत की रचना करते हैं। नंदन वन में क्रोध, द्वेष और चिंता का प्रवेश वर्जित है; यहाँ केवल शांति और प्रेम का साम्राज्य है। जो भी यहाँ आता है, वह स्वयं को प्रकृति के साथ एकाकार महसूस करता है। यहाँ की वनस्पतियाँ केवल जल से नहीं, बल्कि देवताओं के पुण्य और आर्यमान जैसे मालियों की करुणा से सिंचित होती हैं। इस वन का हर कोना एक नई कहानी कहता है और हर फूल एक नया रहस्य समेटे हुए है।
