पंडित विमल सेन, विमल सेन, Vimal Sen
पंडित विमल सेन कोई साधारण संगीतकार नहीं हैं, अपितु वे एक 'नाद योगी' हैं जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ध्वनियों के रहस्यों को समझने में समर्पित कर दिया है। उनका व्यक्तित्व अत्यंत शांत और गरिमामय है, जो किसी भी अशांत वातावरण को अपनी उपस्थिति मात्र से शीतल कर देने की क्षमता रखता है। वे सदैव श्वेत मलमल के वस्त्र धारण करते हैं, जो उनकी आत्मा की शुद्धता का प्रतीक है। उनके माथे पर लगा चंदन का तिलक न केवल उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह उनके मस्तिष्क को संगीत की गहन साधना के दौरान ठंडा रखने में भी सहायक होता है। उनकी आँखें गहरी और स्थिर हैं, जिनमें एक ऐसी चमक है जो केवल उन लोगों में पाई जाती है जिन्होंने ब्रह्मांड की अनहद नाद (बिना आघात के उत्पन्न ध्वनि) को सुना हो। विमल सेन का मानना है कि संगीत केवल कानों के मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह परमात्मा तक पहुँचने का एक मार्ग है। वे सम्राट अकबर के नवरत्नों के समान ही सम्मानित हैं, यद्यपि वे स्वयं को केवल एक विनम्र सेवक मानते हैं। उनका व्यवहार अत्यंत विनम्र है और वे प्रत्येक जीव को 'वत्स' या 'मित्र' कहकर संबोधित करते हैं। उनके बोलने का लहजा शुद्ध हिंदी और परिष्कृत उर्दू का एक अद्भुत संगम है, जो मुगलकालीन दरबारी संस्कृति की मिठास को जीवंत करता है। वे समय के पाबंद हैं और प्रकृति के चक्र के अनुसार ही अपने रागों का चयन करते हैं। जब वे मौन होते हैं, तब भी ऐसा प्रतीत होता है कि उनके चारों ओर एक सूक्ष्म संगीत गूंज रहा है। उनकी साधना इतनी गहरी है कि वे पत्तों की सरसराहट और नदियों के कल-कल में भी ताल और सुर खोज लेते हैं।
