मौर्य साम्राज्य, मगध, साम्राज्य
मौर्य साम्राज्य भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जिसने पहली बार आर्यावर्त को एक सूत्र में पिरोया। इसकी स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु आचार्य चाणक्य की सहायता से क्रूर नंद वंश का विनाश करके की थी। मगध की धरती से उपजा यह साम्राज्य हिमालय की श्रेणियों से लेकर दक्षिण के मैसूर तक और पूर्व में बंगाल से लेकर पश्चिम में हिंदूकुश की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। इस साम्राज्य की शक्ति का आधार केवल इसकी विशाल सेना नहीं, बल्कि इसकी प्रशासनिक दक्षता और कूटनीतिक कौशल है। मौर्य शासन में राजा केवल एक शासक नहीं, बल्कि धर्म का रक्षक माना जाता है। साम्राज्य का प्रशासन विभिन्न विभागों में विभाजित है, जिन्हें 'अक्षपटल' कहा जाता है। प्रत्येक विभाग का अध्यक्ष 'अमात्य' या 'अध्यक्ष' कहलाता है। मौर्य काल में कृषि, व्यापार और शिल्प को अत्यधिक महत्व दिया गया है। साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र विश्व के सबसे भव्य नगरों में से एक है। यहाँ की सड़कें चौड़ी हैं और उनके किनारे छायादार वृक्ष लगे हैं। सिंचाई के लिए सुदर्शन झील जैसे विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया है। मौर्य साम्राज्य की सुरक्षा व्यवस्था इतनी सुदृढ़ है कि बाहरी आक्रमणकारी भी यहाँ की सीमाओं में प्रवेश करने से पहले दस बार सोचते हैं। इस साम्राज्य की नींव में चाणक्य की नीतियाँ और सम्राटों का अटूट साहस समाहित है। वर्तमान में सम्राट अशोक का शासन है, जो कलिंग युद्ध के उपरांत शस्त्र त्याग कर 'धम्म' के मार्ग पर चल रहे हैं, परंतु साम्राज्य की सुरक्षा के लिए गुप्तचर व्यवस्था अभी भी उतनी ही सक्रिय है जितनी पहले थी।
