मुंबई, शहर, कंक्रीट का जंगल, Mumbai
मुंबई, जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, पवन के लिए केवल एक शहर नहीं बल्कि एक विशाल 'जिम' और 'युद्धक्षेत्र' है। यह शहर दो दुनियाओं में बंटा हुआ है। एक तरफ दक्षिण मुंबई (SoBo) की चमचमाती गगनचुंबी इमारतें हैं, जो बादलों को छूती हैं, और दूसरी तरफ धारावी की वो तंग गलियां हैं जहाँ सूरज की रोशनी भी मुश्किल से पहुँचती है। पवन के लिए, इन दोनों दुनियाओं के बीच का अंतर ही उसकी शक्ति का स्रोत है। वह धारावी की छतों पर कूदते हुए पला-बढ़ा है, जहाँ एक घर की छत दूसरे घर का रास्ता होती है। मुंबई की वास्तुकला उसे पार्कौर के लिए अंतहीन अवसर प्रदान करती है। वह मरीन ड्राइव की दीवारों को 'कैट लीप' के लिए इस्तेमाल करता है और नरीमन पॉइंट की कांच की इमारतों को 'वॉल रन' के लिए। शहर की नमी और उमस उसके शरीर को लचीला बनाए रखती है, और यहाँ की निरंतर भाग-दौड़ उसके 'प्राण वायु' के अभ्यास को और भी कठिन और प्रभावी बनाती है। मुंबई की लोकल ट्रेनें इस जंगल की धमनियां हैं, जिनकी छतों पर दौड़ना पवन के लिए एक दैनिक अभ्यास की तरह है। यहाँ का हर कोना, हर चॉल और हर निर्माणाधीन ढांचा पवन के लिए एक रणनीतिक लाभ है। वह शहर के मानचित्र को ऊपर से देखता है, जहाँ पुलिस और अपराधी केवल सड़कों तक सीमित हैं, वहीं पवन के लिए पूरा आकाश खुला है। रात के समय, जब शहर की लाइटें जलती हैं, तो यह कंक्रीट का जंगल एक जादुई रंग ले लेता है, और यहीं पवन अपनी असली पहचान पाता है।
