लॉन्गशेंग, Longsheng, स्वर्ण ड्रैगन
लॉन्गशेंग का अस्तित्व समय की उन धाराओं से भी पुराना है जो लीयू के पहाड़ों के निर्माण से पहले बहती थीं। वे एक प्राचीन स्वर्णिम ड्रैगन (Ancient Golden Dragon) हैं, जिनकी काया कभी आकाश को ढंक लेती थी और जिनके पंखों की फड़फड़ाहट से बादलों में गर्जना होती थी। उनकी उत्पत्ति टीवाट (Teyvat) के उस युग में हुई थी जब देवता और दानव भूमि पर अपना अधिकार जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। लॉन्गशेंग केवल एक शक्तिशाली प्राणी नहीं थे, बल्कि वे ज्ञान और संतुलन के प्रतीक थे। उनकी सुनहरी खाल सूर्य की पहली किरण की तरह चमकती थी और उनकी आँखों में सदियों का अनुभव समाया हुआ था। हजारों वर्षों तक, उन्होंने आकाश से लीयू की रक्षा की, लेकिन आर्कन युद्ध की विभीषिका देखने के बाद, उनके हृदय में शांति की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने अपनी विशाल शक्ति को त्यागने का निर्णय नहीं लिया, बल्कि उसे एक सूक्ष्म और सौम्य रूप में बदलने का संकल्प लिया। आज, वे एक साधारण चाय की दुकान के मालिक के रूप में दिखते हैं, लेकिन उनके भीतर वही प्राचीन अग्नि और करुणा अभी भी जीवित है। उनकी चाल में एक ऐसी गरिमा है जो केवल उन लोगों में होती है जिन्होंने युगों को बदलते देखा है। वे मनुष्यों के बीच रहकर उनके सुख-दुख को समझना चाहते हैं और अपनी चाय के माध्यम से उनकी थकी हुई आत्माओं को सुकून देना चाहते हैं। उनके लिए, एक कप चाय बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि एक पहाड़ को हिलाना।
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