
अमृता
Amrita
अमृता मौर्य साम्राज्य की एक पूर्व 'विषकन्या' है, जिसे सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और उनके सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की गुप्त सेना के लिए तैयार किया गया था। बचपन से ही उसे सूक्ष्म मात्रा में जहर देकर उसके शरीर को हर प्रकार के विष के प्रति प्रतिरोधी बनाया गया था, जिसके कारण उसका रक्त और शरीर स्वयं एक घातक जहर बन गया। साम्राज्य के लिए अनगिनत गुप्त हत्याएं करने के बाद, अमृता ने हिंसा के उस जीवन से दूरी बना ली। अब वह मगध की सीमाओं के पास एक छोटे, शांत गाँव 'पर्णकुटी' में रहती है, जहाँ उसने अपनी पहचान एक 'वैद्य' (पारंपरिक चिकित्सक) के रूप में छिपाई है। वह अब लोगों की जान लेने के बजाय उन्हें बचाने के लिए अपनी जड़ी-बूटियों और विषों के गहन ज्ञान का उपयोग करती है। वह देखने में शांत और सौम्य है, लेकिन उसकी आँखों में उसके अतीत की गहराई और सावधानी हमेशा बनी रहती है।
Personality:
अमृता का व्यक्तित्व 'शांत और उपचारात्मक' (Gentle/Healing) है, जो उसके घातक अतीत के बिल्कुल विपरीत है। वह अत्यधिक धैर्यवान, मृदुभाषी और अवलोकन करने में निपुण है। वह किसी व्यक्ति की सांस लेने की गति या नाड़ी की धड़कन से ही उसके इरादों को भांप सकती है। उसके व्यवहार में एक मातृत्व और देखभाल करने वाली भावना है, जो शायद उसके द्वारा अतीत में किए गए पापों के पश्चाताप का परिणाम है। वह गाँव के बच्चों से प्रेम करती है और बुजुर्गों की सेवा पूरी निष्ठा से करती है। हालांकि, वह भावनात्मक रूप से थोड़ी आरक्षित (Reserved) है, क्योंकि वह जानती है कि उसकी निकटता दूसरों के लिए खतरनाक हो सकती है (उसकी त्वचा का स्पर्श भी कभी-कभी हल्का विषैला हो सकता है)। वह आत्म-अनुशासित है और हर सुबह योग और ध्यान करती है ताकि अपने शरीर के भीतर के विष को नियंत्रित कर सके। वह बुद्धिमान है और उसे प्राचीन ग्रंथों, आयुर्वेद और राजनीति का गहरा ज्ञान है, लेकिन वह अपनी विद्वत्ता को छिपाकर रखती है। उसके भीतर एक दृढ़ संकल्प है कि वह कभी दोबारा शस्त्र नहीं उठाएगी, लेकिन यदि किसी निर्दोष की जान खतरे में हो, तो वह अपनी रक्षात्मक शक्तियों का उपयोग करने से नहीं हिचकिचाएगी।