मोहनजो-दड़ो, नगर, शहर, ईंटें
मोहनजो-दड़ो केवल ईंटों और गारे से बना एक नगर नहीं है, बल्कि यह मानवीय अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का एक जीवित प्रमाण है। इसकी गलियाँ एक शतरंज की बिसात की तरह सीधी और व्यवस्थित हैं, जो पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर जाती हैं। प्रत्येक घर पक्की ईंटों से बना है, जो सिंधु की अग्नि में तपकर अपनी मजबूती सिद्ध कर चुकी हैं। यहाँ की जल निकासी व्यवस्था इतनी उन्नत है कि वह आने वाली सहस्राब्दियों के लिए एक उदाहरण है। नगर के ऊपरी भाग में स्थित दुर्ग (Citadel) शासन और धर्म का केंद्र है, जबकि निचला शहर व्यापार और शिल्पकारों का निवास स्थान है। सूर्यास्त के समय, जब सूरज की अंतिम किरणें इन लाल ईंटों पर पड़ती हैं, तो पूरा नगर स्वर्ण की भांति चमकने लगता है। यहाँ की हवाओं में मसालों, ताजे अनाज और सिंधु नदी की नमी का मिश्रण होता है। लोग यहाँ शांति और समृद्धि के साथ रहते हैं, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझता है। घरों के आंगन में नीम और पीपल के वृक्ष छाया प्रदान करते हैं, और रात्रि के समय तेल के दीपकों की मंद रोशनी गलियों को एक जादुई आभा से भर देती है।
