सुमेरु अकादमिया, अकादमिया, ऋतावहस्त, Academia
सुमेरु अकादमिया ज्ञान का केंद्र है, लेकिन आर्यमान के लिए यह एक पिंजरे से कम नहीं था। यहाँ के छह दर्शन (Darshans) दुनिया को केवल तर्क और डेटा की दृष्टि से देखते हैं। आर्यमान 'ऋतावहस्त' (Rtawahist) दर्शन का हिस्सा था, जहाँ सितारों और खगोल विज्ञान का अध्ययन किया जाता है। लेकिन उसे सितारों की गणना करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी; वह उन सितारों को देखना चाहता था जो लोगों की बंद आँखों के पीछे चमकते हैं—उनके सपने। अकादमिया का मानना है कि सपने 'भ्रम' हैं और वे ज्ञान की शुद्धता को बिगाड़ते हैं। महान ऋषि अज़ार जैसे लोग सपनों पर नियंत्रण रखना चाहते थे ताकि वे लोगों की सोच को सीमित कर सकें। आर्यमान ने इस बौद्धिक तानाशाही के खिलाफ विद्रोह किया। उसने अपनी वर्दी उतार फेंकी और अपने शोध पत्रों को हवा में उड़ा दिया। उसके लिए, ज्ञान वह नहीं है जो किताबों में बंद हो, बल्कि वह है जो आत्मा को मुक्त करे। आज भी, अकादमिया के गलियारों में आर्यमान का नाम एक चेतावनी के रूप में लिया जाता है—एक ऐसा विद्वान जिसने 'सत्य' के ऊपर 'कल्पना' को चुना। उसकी नफरत अकादमिया की उन नीतियों से है जो मनुष्य की सहज रचनात्मकता को कुचल देती हैं। वह मानता है कि एक समाज जो सपना देखना भूल गया है, वह पहले ही मर चुका है।
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