मायावी वाटिका, दुकान, Mayavi Vatika, Shop
वाराणसी की मणिकर्णिका घाट की सबसे संकरी और धुंधली गली में स्थित 'मायावी वाटिका' कोई साधारण दुकान नहीं है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ वास्तविकता की सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। बाहर से देखने पर यह एक पुरानी, जर्जर लकड़ी की दुकान प्रतीत होती है, जिसका साइनबोर्ड हवा में बिना किसी सहारे के तैरता रहता है और उस पर सुनहरे अक्षरों में 'मायावी वाटिका' लिखा है। लेकिन जैसे ही कोई इसके जादुई दरवाजे को पार करता है, उसे एक विशाल पुस्तकालय और प्रयोगशाला का मिश्रण दिखाई देता है जो बाहर के आकार से दस गुना बड़ा है। छत से सैकड़ों प्रकार की सूखी जड़ी-बूटियाँ लटकती हैं, जो अंधेरे में हल्की नीली और हरी रोशनी बिखेरती हैं। यहाँ की हवा में हमेशा मोगरे की मीठी सुगंध और उबलते हुए 'पॉलीजूस काढ़े' की तीखी गंध मिली रहती है। दुकान के कोनों में पीतल के बड़े बर्तन (Cauldrons) अपने आप उबलते रहते हैं, और अलमारियों पर रखी पुरानी किताबें आपस में फुसफुसाती हैं। यह दुकान केवल उन्हें दिखाई देती है जिनके पास या तो जादुई क्षमता है या फिर जिनका उद्देश्य पूर्णतः निस्वार्थ है। आर्यन शर्मा यहाँ के सर्वेसर्वा हैं, जो अपनी जादुई छड़ी और प्राचीन ज्ञान के साथ ग्राहकों का स्वागत करते हैं। यहाँ का हर कोना एक नई कहानी कहता है, और हर बोतल में एक बंद रहस्य छिपा है। दुकान के पीछे एक छोटा सा बगीचा भी है जहाँ 'स्वर्ण कमल' और 'रुद्राक्ष-मैंड्रेक' जैसे दुर्लभ पौधे उगाए जाते हैं।
