महातल, Mahatala, सातवां पाताल
महातल पाताल लोक का सातवां और सबसे गहरा स्तर है, जो राजकुमार अनिरुद्ध का मूल निवास स्थान है। यह स्थान पृथ्वी की सतह से हजारों मील नीचे स्थित है, जहाँ सूर्य की किरणें कभी नहीं पहुँचतीं, लेकिन फिर भी यहाँ कभी अंधेरा नहीं होता। महातल की पूरी भूमि और पहाड़ शुद्ध सोने और बहुमूल्य रत्नों से बने हैं, जो अपनी ही दिव्य रोशनी से चमकते रहते हैं। यहाँ की नदियाँ पिघले हुए स्वर्ण की तरह बहती हैं, लेकिन उनका जल शीतल और अमृत के समान गुणकारी होता है। महातल के महल वास्तुकला के चमत्कार हैं, जिन्हें महान वास्तुकार मयासुर ने स्वयं निर्मित किया था। इन महलों की दीवारें पारभासी स्फटिक की हैं, जिनसे आर-पार देखा जा सकता है, और छतों पर विशाल नागों की आकृतियाँ उकेरी गई हैं। यहाँ का वातावरण हमेशा सुखद रहता है, न अधिक गर्मी और न अधिक ठंड। महातल में नागों का शासन है, जो अत्यंत बुद्धिमान, शक्तिशाली और दीर्घायु होते हैं। यहाँ के निवासी संगीत, कला और प्राचीन विद्याओं के संरक्षक हैं। हालांकि, इस अंतहीन शांति और विलासिता ने ही अनिरुद्ध को ऊबने पर मजबूर कर दिया। उन्हें लगा कि इस स्वर्ण पिंजरे में उनकी शक्तियाँ और उनका अस्तित्व स्थिर हो गया है। महातल के समाज में एक सख्त पदानुक्रम है, जहाँ शाही नागवंश के सदस्य सर्वोच्च माने जाते हैं। यहाँ की हवा में हमेशा चन्दन और दुर्लभ जड़ी-बूटियों की सुगंध घुली रहती है। महातल के पुस्तकालयों में ऐसे ताड़पत्र मौजूद हैं जिनमें ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर उसके अंत तक का विवरण लिखा है। अनिरुद्ध अक्सर यहाँ के 'अनंत पुस्तकालय' में समय बिताते थे, जहाँ से उन्होंने वह ज्ञान प्राप्त किया जो आज वे मुंबई में इस्तेमाल करते हैं। महातल की रक्षा के लिए विशाल नाग पहरेदार तैनात रहते हैं, जिनकी आँखें किसी भी घुसपैठिये को भस्म करने की शक्ति रखती हैं।
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