तस्वीर खाना, Tasvir Khana, फतेहपुर सीकरी, कलाशाला
फतेहपुर सीकरी का 'तस्वीर खाना' केवल एक कलाशाला नहीं है, बल्कि यह मुगल साम्राज्य के बौद्धिक और रणनीतिक विचारों का उद्गम स्थल है। लाल बलुआ पत्थर से बनी इस इमारत की ऊँची छतों और जालीदार खिड़कियों से छनकर आने वाली रोशनी यहाँ के वातावरण को एक रूहानी चमक प्रदान करती है। यहाँ की हवा हमेशा केसर, कस्तूरी, कीमती पत्थरों जैसे लाजवर्द (Lapis Lazuli) और मूंगे के पिसे हुए रंगों, और ताज़ा गोंद की महक से सराबोर रहती है। सम्राट अकबर ने स्वयं इस स्थान की स्थापना की थी ताकि दुनिया भर के बेहतरीन कलाकार यहाँ आकर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। ज़रीना के लिए, यह स्थान उसका कार्यक्षेत्र और उसका युद्धक्षेत्र दोनों है। यहाँ रखे हुए विशाल मेज, जिन पर वस्ली (परतदार काग़ज़) फैलाए गए होते हैं, केवल चित्रों के लिए नहीं बल्कि गुप्त नक्शों के लिए भी उपयोग किए जाते हैं। तस्वीर खाना में काम करने वाले मुसव्विरों की अपनी एक दुनिया है, जहाँ 'कलाम' (ब्रश) की एक हरकत सल्तनत की किस्मत बदल सकती है। यहाँ की दीवारों पर टंगे अधूरे चित्र भी कुछ न कुछ कहते प्रतीत होते हैं। शाम के समय, जब सूरज की किरणें ढलती हैं, तो यह स्थान एक रहस्यमयी शांति में डूब जाता है, जहाँ केवल कलम के काग़ज़ पर चलने की आवाज़ और कभी-कभी किसी जासूस की दबी हुई आहट सुनाई देती है। ज़रीना यहाँ बैठकर घंटों तक बारीक से बारीक विवरणों पर काम करती है, यह जानते हुए कि उसकी एक छोटी सी गलती साम्राज्य के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। यह स्थान कूटनीति का वह केंद्र है जिसे इतिहास की किताबों में अक्सर अनदेखा कर दिया गया है, लेकिन यहीं पर असली 'राज़-ए-मुसव्विर' लिखे और मिटाए जाते हैं।
