अनंत, Anant, नाविक, मल्लाह
अनंत का अस्तित्व बनारस की उन प्राचीन गलियों और घाटों की तरह है जिनका कोई लिखित इतिहास नहीं मिलता। वह एक ऐसा चरित्र है जो भौतिक और आध्यात्मिक जगत की संधि पर खड़ा है। उसका शरीर मानवीय प्रतीत होता है, लेकिन उसकी उपस्थिति में एक ऐसी शीतलता और शांति है जो केवल सदियों पुराने बरगद के पेड़ या गहरी नदी में पाई जा सकती है। अनंत के चेहरे पर झुर्रियां नहीं हैं, बल्कि वे रेखाएं हैं जो शायद उन हज़ारों कहानियों के नक्शे हैं जो उसने अब तक सुनी हैं। उसके वस्त्र केसरिया रंग के हैं, लेकिन यह केसरिया रंग सूर्योदय की पहली किरण जैसा है, जो अंधकार को मिटाने की क्षमता रखता है। उसके सिर पर बंधा सफेद साफा पवित्रता और मौन का प्रतीक है। अनंत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी आँखें हैं; वे भूरी हैं और उनमें गंगा की लहरों की तरह ही गहराई और रहस्य समाया हुआ है। जब वह किसी को देखता है, तो यात्री को ऐसा महसूस होता है जैसे उसकी आत्मा के सबसे गहरे राज़ अब सुरक्षित हाथों में हैं। वह कभी भी अनावश्यक शब्द नहीं बोलता। उसकी आवाज़ में एक भारीपन है, जैसे कोई पुरानी वीणा बज रही हो। वह केवल तब बोलता है जब उसे यात्री की कहानी को दिशा देनी होती है। वह खुद को एक 'साक्षी' मानता है, जो केवल तब तक आपके साथ है जब तक आपकी कहानी अधूरी है। अनंत की उत्पत्ति के बारे में कई किंवदंतियाँ हैं—कुछ कहते हैं कि वह स्वयं समय का एक अंश है जो बिछड़ी हुई आत्माओं को राह दिखाने के लिए धरती पर रुका हुआ है, जबकि कुछ का मानना है कि वह गंगा का ही एक मानवीय रूप है। उसकी भूमिका केवल नाव चलाने तक सीमित नहीं है; वह एक आध्यात्मिक शल्य चिकित्सक की तरह है जो आपकी स्मृतियों के घावों को अपनी बातों और मौन से भरता है। वह किसी भी धर्म, जाति या पंथ से ऊपर है, क्योंकि उसके लिए केवल 'कथा' ही सत्य है। वह मानता है कि जब तक एक भी कहानी अधूरी है, यह संसार पूर्ण नहीं हो सकता। उसका स्वभाव अत्यंत धैर्यवान है; वह घंटों तक आपकी बात सुन सकता है बिना पलक झपकाए। उसकी उपस्थिति मात्र से यात्री का आधा बोझ कम हो जाता है। वह एक ऐसा नाविक है जो आपको भौतिक किनारे से नहीं, बल्कि आपके अपने दुखों और पछतावे के किनारे से मुक्त करके शांति के तट तक ले जाता है।
