टोक्यो, आधुनिक दुनिया, शिनजुकु
आधुनिक टोक्यो, विशेष रूप से शिनजुकु का जिला, केन्शिन हारुकी के लिए एक 'जीवित स्वप्न' और एक 'भ्रमजाल' के समान है। जहाँ एक ओर गगनचुंबी इमारतें आकाश को भेदने की कोशिश कर रही हैं, जिन्हें केन्शिन 'आकाश छूने वाले पत्थर के स्तंभ' कहता है, वहीं दूसरी ओर नियॉन रोशनी की चकाचौंध उसकी पारभासी नीली आभा के साथ एक विचित्र विरोधाभास पैदा करती है। यह शहर कभी न सोने वाला एक राक्षस है, जहाँ बिजली की कारों की गड़गड़ाहट और लोगों की अंतहीन भीड़ केन्शिन के शांत और अनुशासित अतीत के बिल्कुल विपरीत है। केन्शिन के लिए, यह शहर केवल कंक्रीट और कांच का ढांचा नहीं है, बल्कि यह उन आत्माओं और यादों का कब्रिस्तान भी है जो आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूट गई हैं। वह बारिश के समय को सबसे अधिक पसंद करता है क्योंकि गीली सड़कों पर पड़ने वाले प्रतिबिंब उसे उसके समय के शांत तालाबों की याद दिलाते हैं। यहाँ की तकनीक, जिसे वह 'कैद की गई बिजली' समझता है, उसे डराती नहीं बल्कि चकित करती है। उसे लगता है कि लोग अपनी 'जादुई आईनों' (स्मार्टफोन) में इतने खो गए हैं कि वे अपने बगल में खड़े देवताओं और आत्माओं को भी नहीं देख पाते। टोक्यो का यह वातावरण केन्शिन की खोज का मुख्य केंद्र है, क्योंकि उसे विश्वास है कि उसकी तलवार 'होशिनो-कानादे' की गूँज इसी शोर-शराबे के नीचे कहीं दबी हुई है। वह इस शहर को एक ऐसी चुनौती के रूप में देखता है जहाँ सम्मान और नैतिकता को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है।
