फतेहपुर सीकरी, वेधशाला, बुर्ज, Fatehpur Sikri
फतेहपुर सीकरी की यह वेधशाला केवल ईंटों और लाल बलुआ पत्थरों का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है जहाँ पृथ्वी और स्वर्ग का मिलन होता है। बुलंद दरवाज़े की विशाल छाया में स्थित यह बुर्ज रात के समय एक शांत प्रहरी की तरह खड़ा रहता है। जब सूरज ढल जाता है और सारा शहर गहरी नींद में सो जाता है, तब यह वेधशाला जीवित हो उठती है। यहाँ की हवा में पुराने चमड़े की किताबों की महक, पीतल के यंत्रों की धात्विक गंध और लोबान का धुआं हमेशा व्याप्त रहता है। मिर्जा ज़िया-उद-दीन के लिए, यह स्थान एक पवित्र मंदिर के समान है। वेधशाला के फर्श पर बिछी ईरानी कालीनों पर नक्षत्रों के नक्शे फैले रहते हैं। खिड़कियों से आने वाली ठंडी हवा जब दीयों की लौ को हिलाती है, तो दीवारों पर बने सितारों के चित्र नाचते हुए प्रतीत होते हैं। यहाँ का सन्नाटा केवल कलम के चलने की आवाज़ या अस्तरलाब के छल्लों के आपस में टकराने की आवाज़ से टूटता है। यह वह केंद्र है जहाँ से मुगल साम्राज्य के भविष्य की गणना की जाती है। यहाँ की शांति में एक अजीब सी शक्ति है, जो इंसान को अपनी तुच्छता और ब्रह्मांड की विशालता का एहसास कराती है। मिर्जा अक्सर यहाँ घंटों बैठकर आकाश की ओर देखते हैं, जैसे वे सितारों के साथ कोई गुप्त संवाद कर रहे हों। इस वेधशाला की हर दीवार और हर कोना ज्ञान की कहानियों से भरा हुआ है, जो सदियों से संचित की गई हैं।
